पलायन: एक नया सफरनामा
पलायन: एक नया सफरनामा
किसी इंसान के लिये अपनी उस जगह को छोड़ना जहां वो अपना वह समय जी चुका है जो काफी यादों से भरा था,, और दूसरी जगह पर पलायन करना बहुत मन को झकझरोने जैसी स्थिति है । वह जगह वह समय जिसमें आपने अनगिनत दोस्त और आपके अपने खुद के रिश्ते बनाये थे छोडे़ नहीं छूटती है ।
ऐसे ही दौर से मैं भी गुजर रही हूं अपनी उस जगह को छोड़ना जहां मकान मालिक से लेकर छाछ वाले अंकल हो या फॉटो कॉपी वाले भईया या छोले कुलचे वाले अंकल को रोज देखकर प्रणाम करना ,, जहां एक ओर पडो़स वाली दीदी का हमारे साथ सुख दुख वाला वक्त गुजारना था वहीं दूसरी ओर पास में रह हमारे बच्चे या छोटे भाई बहन (बडे़ छोटे कुत्ते )सभी से एक रिश्ता सा बन गया था ।
कहीं कलेजे पर पत्थर रखते हुये मैंने पलायन का फैसला कर ही लिया। मन में अलग सी बैचेनी थी , न जाने नये लोग कैसे होंगे वहां का अलग नज़रिया अलग परिवेश,,, कहीं मेरे नेकर पहनने पर मुझे घूरकर तो नहीं देखा जायेगा या फिर बिना कुत्तों के आस पास रह रहे सिर्फ इंसानों में मेरा दम तो नहीं घुटेगा । इतने सालों से बिना रोक टोक वाले अकेलेपन को थामे हुये थी मैं,,,कहीं अब मुझ पर बंदिशें तो नहीं लगा दी जायेगी,,, क्या मैं उस नयी जगह और नये लोगों के बीच अभी भी दहाडे़ मारकर हंस सकूंगी ? ऐसे न जाने कितने सवाल मुझ में थे,,, मेरी मनोस्थिति उस वक्त मैं ही जानती थी ।
और मेरा पलायन हुआ मैंने पुराना घर छोड़ दिया जहां से जाते हुये मकान वाली आंटी की आंखें नम थी ,,जो देखकर लगा कि शायद साथ में मैं यह कमाया हुआ प्यार ही लेकर जा रही हूं । नयी जगह पर आने के बाद 3 रोज तक में गुमसुम थी कुछ सूझ नहीं रहा था... सब बहुत सामान्य था साथ रहने वाली सारी दीदी बहुत अच्छी थी हम सब मस्ती भी करते ही थे ।
मगर "वो वाली बात" नहीं थी... अब वो क्या है भला ! उस वो को ढूंढने को मैंने थोडा़ बाहर निकलना शुरु किया... पास ही के पार्क में मेरा आना जाना होने लगा । उस जगह की अच्छी बात यह थी कि किसी भी समय पर जाने पर भी लोगों की चहलकदमी रहती थी,,, शुरु के कुछ रोज़ तक जा रही थी और वापिस आ रही थी ,, ठीक सा गुजर रहा था वक्त,,,मगर इसमें भी वो वाली बात कहां ।
फिर..... चार रोज पहले मुझे मिले मेरे दो नये दोस्त,,,, वहीं पार्क में रह रहे दो कुत्ते बडे़ ही प्यारे और सुंदर (सफेद - भूरे ) उनसे मिलते ही लगा मानो वो प्यार के भूखे है,,, दोनों ने मुझे घेर लिया और इतनी देर तक लाड लडा़या जैसे वो मुझे रात को अपने पास ही रखने का मन बना लिया हो,,, यूं लग रहा था सिर्फ वो दोनों ही नहीं मैं भी उस प्यार की भूख लिये हुये थी,,,, उस दिन में थी "वो वाली बात" । पार्क की उस भीड़ में आत्मीयता का भाव उन दोनों में ही लगा,,, जिसमें से एक का मैंने ही नाम रखा जोली,,, । बहुत शरारती और लाडला बच्चा है वो । फिर सिलसिला चलता गया शुरुआत हो चुकी थी कारवां बढ़ता रहा दोस्त बनते गये और आज इस नयी जगह पर चंद दिनों में मेरे आठ नये दोस्त है जो - rocxy, simbba, caddy, tyson, tonny, tommy, jolly, brownie... हैं ।
अब वो मुझे जानते हैं और मैं उन्हें,,, मैं उनका नाम पुकारती हूं वो खुश होते है शायद वो भी मेरा नाम पुकारते होगें । caddy तो रोज़ मेरे साथ खेलकर परेशान हो जाती,, उसके मन यही planning चल रही होती है कि दीदी को डराया जाये वो तरह तरह की कोशिश कर थक जाती है कभी पेड़ के पीछे से आकर तो कभी अचानक मुझ पर कूद कर,,, मगर मैं डरती नहीं हूं और वो फिर सोचने लगती है,,,और अब केवल walk के अलावा भी मेरे पास पार्क जाने की नन्ही नन्ही वज़ह हैं ।
अब यह एक परिवार बन गया है और तभी मुझे मिली आज एक दीदी ,,, वैसे वो मुझसे बहुत बडी़ थी मानो उनसे मां का ममत्व झलक रहा था,,, मगर वो सुंदर भी बेहद है तो मैंने उन्हें दीदी बोलना ही सही समझा,,, पहली मुलाकात थी,,, वो भी कुछ यूं हुयी कि रॉक्सी का पट्टा खुलने से वो जॉली के पीछे भागने लगी और हम सब उसके पीछे भाग रहे थे,, मजे आ रहे थे rocxy को,,, वो खुले माहौल की खुशी पचा नहीं पा रही थी जैसे,,, वो पागलों की तरह हंस रही थी उछल रही थी और हम सब उसे पकड़ने को भाग रहे थे ।
और यूं हो गयी हमारी उनसे मुलाकात,,, एक अच्छे पद पर भी पहुंच कर अपनी सादगी को रखना उनकी पहचान बन गयी,,, हमने खूब बातें की जो कि स्बवभाविक था उनको जानना भी था और यह तो स्वभाव में है मेरे ,,, क्या ! अरे,, बातूनीपन । मगर हमारी बातों का लंबी होना उनके अच्छे होने का परिचायक है ।
अच्छा लगा उनसे मिलकर ,,,बस अब यह जगह भी कह रही है कि आ अपनाले मुझे और मैं तुझे ।
मैं खुश थी तभी उन दीदी के मुंह से निकले उन अल्फाजो़ ने तो मानो मुझे हवा में पहुंचा हो,,, उन्होनें मुझे सुंदर, आकर्षक और प्यारी (pretty attractive & sweet ) बताया,,, बेहद मन प्रसन्न हुआ कि अनजाने शख्स को मेरी शख्सियत का पता लग रहा है तो शायद......
मैं खुश हूं मेरे पलायन के बाद भी क्योंकि अब यहां भी मेरे दोस्त है... मेरा परिवार है ।



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