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पलायन: एक नया सफरनामा

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पलायन: एक नया सफरनामा किसी इंसान के लिये अपनी उस जगह को छोड़ना जहां वो अपना वह समय जी चुका है जो काफी यादों से भरा था,, और दूसरी जगह पर पलायन करना बहुत मन को झकझरोने जैसी स्थिति है । वह जगह वह समय जिसमें आपने अनगिनत दोस्त और आपके अपने खुद के रिश्ते बनाये थे छोडे़ नहीं छूटती है । ऐसे ही दौर से मैं भी गुजर रही हूं अपनी उस जगह को छोड़ना जहां मकान मालिक से लेकर छाछ वाले अंकल हो या फॉटो कॉपी वाले भईया या छोले कुलचे वाले अंकल को रोज देखकर प्रणाम करना ,,  जहां एक ओर पडो़स वाली दीदी का हमारे साथ सुख दुख वाला वक्त गुजारना था वहीं दूसरी ओर पास में रह हमारे बच्चे या छोटे भाई बहन (बडे़ छोटे कुत्ते )सभी से एक रिश्ता सा बन गया था । कहीं कलेजे पर पत्थर रखते हुये मैंने पलायन का फैसला कर ही लिया। मन में अलग सी बैचेनी थी , न जाने नये लोग कैसे होंगे वहां का अलग नज़रिया अलग परिवेश,,, कहीं मेरे नेकर पहनने पर मुझे घूरकर तो नहीं देखा जायेगा या फिर बिना कुत्तों के आस पास रह रहे सिर्फ इंसानों में मेरा दम तो नहीं घुटेगा । इतने सालों से बिना रोक टोक वाले अकेलेपन को थामे हुये थी मैं,,,कहीं अब मुझ पर ब...